डिजिटल इंडिया की रफ्तार पर जोर देने के लिए पीएम मोदी ने सबसे धाकड़ प्लान तैयार किया है। गांवों से इस प्लान की शुरूआत हो रही है।

आपको याद ही होगा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने साफ कहा था कि देश को डिजिटल राह पर ले जाना उनका सबसे बड़ा मकसद है। पीएम मोदी द्वारा सुझाए गए इसी रास्ते पर भारत लगातार आगे बढ़ता जा रहा है। सरकार का मानना है कि इसके लिए सबसे पहले देश के उन इलाकों तक इंटरनेट और वाई-फाई पहुंचाना है, जहां लोग अभी इसका मतलब भी नहीं समझते हैं। आम तौर पर देखा गया कि नोटबंदी के बाद से शहरी लोगों में तो डिजिटल ट्रांजेक्शन को लेकर काफी जोश देखा गया लेकिन इतना ही बुरा प्रभाव देशभर के गांवों पर भी पड़ा है। ग्रामीण इलाकों के लोगों को अभी स्मार्टफोन से कोी लेना-देना नहीं है। इसके साथ ही इस बात की कमी भी देखने को मिली है कि ग्रामीण इलाकों के लोगों ने डिजिटल ट्रांजेक्शन को अब तक ज्यादा पसंद नहीं किया है।
हालांकि धीरे धीरे देश डिजिटल राह पर आगे बढ़ता जा रहा है। माना ये भी जा रहा है कि देश के ग्रामीण इलाकों के लोग धीरे धीरे अब इस रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं , लेकिन सबसे बड़ा रोड़ा है नेट कनेक्टिविटी का, इसके लिए सरकार ने प्लान तैयार कर दिया है। देश के ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं होना डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यावस्था के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा है। इसलिए माना जा रहा है कि सरकार 1 हजार से भी ज्यादा ग्राम पंचायतों में फ्री वाईफाई की सुविधा देने वाली है। बताया जा रहा है कि ग्रामीण इलाकों के लोगों को जरूरी कामों के लिए फ्री में इंटरनेट मुहैया कराना इस अभियान का पहला मकसद है। इसके अलावा इस अभियान इंटरनेट के माध्यम से लोगों को हेल्थ और शिक्षआ जैसी सुविधाएं मुहैया कराना भी जरूरी है।
बताया जा रहा है कि इस प्रोजक्ट का नाम डिजिटल विलेज दिया गया है। इस प्रोजक्ट के अंतर्गत अभी देशभर की 1,050 ग्राम पंचायतों को जोड़ा गया है। बताया जा रहा है कि ये प्रॉजेक्ट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत चलाया जाएगा। साथ ही इस प्रोजक्ट को कॉमन सर्विस सेंटर्स यानी सीएससी की मदद से चलाया जाएगा। बताया जा रहा है कि इसके तहत अलग-अलग सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ मिलकर काम किया जाएगा। प्लान ये है कि जो कॉमन सर्विस सेंटर होंगे, वो ग्रामीण इलाकों में डिजिटल सर्विस देने के लिए नोडल प्वाइंट के तौर पर काम करेंगे। सीधे शब्दों में कहें तो ऑनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस और वोटर आईडी कार्ड बनाने के लिए आपको अब इन नोडल सेंटर्स में जाना पड़ेगा।
कुल मिलाकर कहें तो डिजिटल इंडिया को ग्रामीण इलाकों तक ले जाने में ये प्रोजक्ट काफी जरूरी है। बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट को 423.26 करोड़ रुपये का बजट देकर मंजूरी मिली है। इसके साथ ही कहा जा रहा है कि इस प्रोजक्ट को तीन साल के भीतर ही लागू कर दिया जाएगा। इसके अलावा इस प्रोजक्ट के लिए ढाई साल का ऑपरेशन और मेंटेनेंस दिया जाएगा। इसके अलावा कहा जा रहा है कि सरकार इस वक्त सभी विकल्पों पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि ये अभियान पीएम मोदी के डिजिटल इंडिया को नई उड़ान दे सकता है। कुल मिलाकर कहें तो इस वक्त भारत सरकार भारत को डिजिटल ट्रंजेक्शन की तरफ ले जाने के लिए लगातार काम कर रही है और आने वाले वक्त के लिए इस योजना को बेहतरीन माना जा रहा है।