यौन उत्पीड़न को लेकर पीएम मोदी सख्त, जारी किए नए दिशा-निर्देश

Sexual Harassment at work

नई दिल्‍ली। ऑफिस चाहे सरकारी हो या निजी। यौन उत्‍पीड़न की खबरें दोनों जगहों से आती है। आज के समय में यौन उत्‍पीड़न अपराध की श्रेणी में गिना जाता है। इसको लेकर मोदी सरकार काफी सख्‍त है। मोदी सरकार ने ससख्‍त निर्देश देते हुए कहा है कि यौन उत्‍पीड़न की शिकायतों को तीस दिन के अंदर निपटाया जाए।
यौन उत्‍पीड़न करने वाली पीड़िता की हो सुरक्षा
ज्‍यादातर मामलों में पाया गया है कि ऑफिस में काम करने वाली महिला अगर इसके खिलाफ आवाज उठाती है तो लोग उससे एवॉइड करने लगते हैं। लोगों का उसके प्रति नजरिया बदल जाता है। ऐसे में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने पीड़िता के हितों की रक्षा को सुनिश्च‍ित करने का निर्देश जारी किया है और अगर महिला के आरोप साबित हो जाते हैं तो यह भी सुनिश्च‍ित करना होगा कि अगले पांच वर्षों तक पीड़िता प्रतिशोध का शिकार न बने।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का हस्तक्षेप
कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न कानून के तहत, जांच समिति को अब 90 दिनों के भीतर ही अपनी रिपोर्ट देनी होगी। दरअसल, कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न जैसे मामलों की सुनवाई में होने वाली देरी को लेकर अक्टूबर 2016 में महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने निराशा व्यक्त की थी और कहा था कि इसमें जल्द ही बदलाव होंगे और महिलाओं की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होगी।

दोषी के साथ काम करने की नहीं होगी मजबूरी
DoPT के निदेशक मुकेश चतुर्वेदी ने बताया कि नये नियमों के तहत पीड़िता को किसी भी ऐसे व्यक्त‍ि के साथ काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जिस पर उसने आरोप लगाए हैं या जहां उसका उत्पीड़न हो सकता है।

यौन उत्पीड़न मामलों की रिपोर्टिंग को किया जा रहा नजरअंदाज
यौन उत्‍पीड़न को लेकर एक मुख्‍य बात सामने आई है वह है इसका खुलासा नहीं किया जाता। साल 2015 में सिर्फ आठ विभागों ने यौन उत्पीड़न पर आधारित रिपोर्ट जारी किए, जिसमें एटोमिक एनर्जी विभाग से सबसे ज्यादा 15 मामलों की रिपोर्ट दी गई। नये निर्देशों के तहत अब ऐसे मामलों और उन पर की गई कार्रवाई पर आधारित सालाना रिपोर्ट विभागों को जमा करनी होगी।